Story -7 "रुदाली" - Piyush gurunani उसके एक सवाल पर मैं भागकर घर आ गया ....शहर में कुछ दिन बाद उसकी फिर याद आने लगी , शायद एक वो ही थी जिसके लिए मैंने, मैंने अब तक शादी नहीं की, बस काम काम काम किया और अब उससे दूर भाग रहा हूं...उस बेचारी रुदाली ने कितना कुछ सहा है । औरों के मातम में रोते रोते वो अपने शराबी पति की मौत पर भी ना रोपाई ,उस खाली रुदाली से मैं प्रेम कर भाग आया , एक धक्का और मार आया उसे...बस मैंने घर फोन कर बोल दिया उस रुदाली को घर भिजवा दो यहां एक काम करने वाली चाहिए । मैंने अपनी जिंदगी ऐयाशियों में बिता दी मगर रुदाली से मैंने सिर्फ प्रेम किया । वो आई मगर कुछ बोली नहीं शायद रो कर आई थी , गले लगाने का मन था पर मैं भी रो पड़ता ..कुछ समय हमने साथ गुज़रा... तू साथ है मेरे तू साथ है रोते हैं हम रोते हो तुम क्यों हम साथ हैं हम साथ हैं तेरे हम साथ हैं अब ? घर है तेरा घर है मेरा तो क्या बात है क्या बात है मिट्टी के बर्तन में खाना मुझे देना मिलकर हम दोनों संग साथ रहे हरदम तारों के बादल से चलकर तुम आना रहेंगे हम रहेंगे हम ...