●कविता-आँखो का अन्धेरा -पियूष गुरुनानी जब भी आँख बन्द करते हो... मे दिखता हूँ तुम्हे अन्धेरे के समय बन्द आँखो के समय हल्की काली लकीरे दिखेंगी तुम्हे जो होगी बारीक सेवइए जेसी उसमे दूर तक देखने की कोशिश करना उसमे सब मिलेगा पेड़-पौधे ,झरना बोलती चमडी वाले जानवर भी होगें.. थोडा और दूर देखना... तुम अकेले खडे होगे अगर जल्द ही उजाला नही मिला, तो उसी से अपने अन्धेरे को भरना, लेकिन ध्यान रखना एक चीज़ बस वहा खो मत जन हमेशा के लिए...