Story-10 " Tree man ". -पियूष गुरुनानी मेरी आँखे अस्पताल में खुली , मुझे याद आया मैं तो सहाना से मिलने उसके शहर जा रहा था । कई दिनों से मेरे शरीर पर लाल-धब्बे हो रहे थे , पर मैने उन्हें अनदेखा करदिया.... डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे - " ट्री सिंड्रोम" है ....मेरी दुनिया ही पलट गई इसके बारे में मैने कॉलेज में पड़ा था , ये एक रेयर स्किन कैंसर है , जो 10 लाखो में किसी एक को होता है ,बचपन से ये मेरे खून में था पर अब पंपा है , इस बीमारी में मेरे हाथ-पाव एक पैड़ की छाल जैसे होते चले जाएंगे और धीरे-धीरे मेरे शरीर पर फेलेंगे , और मेडिकल साइंस में इसका कोई इलाज नही , डॉक्टर बोल नही पाया कि में जल्द मरूँगा...उन्होंने कहा सबको कुछ छोड़कर बस यहां भर्ती हो जाऊं...मैने उनसे एक दिन और मांगा और टोंगी के लिए निकल गया...ढाका से टोंगी का रास्ता ज़्यादा लंबा नही था,. बार-बार मेरे मन मे एक ही बात उभर रही थी "सहाना का क्या होगा"....मुझे पता था , मुझे अब क्या करना है...मैं उसके घर पहुँचा... सहाना ओ सहाना बाहर आ अबुल तुम.... तुमने शराब पी है? एक मेडिकल स्टूडेंट होकर?...चलो ...