पस्चताप के आसूँ -दीनदयाल शर्मा (कहानी) -पियूष गुरुनानी (कविता) पप्पू-कालू गए मास्टर के घर मांगी कुछ किताबे जो सके वो पढ़ मास्टर ने चाँय पिलाई कालू ने कि खिलाई पप्पू ने डाट लगाई कालू ने चवन्नी घर से चुराई मास्टर को हो गया उस पर शक कालू ने अंत मे दी सच्चाई बक स्नेह-रंज से गले सोए पश्चाताप के आँसू रोए।