"मंगल" -पियूष गुरुनानी प्लूटो- पापा , हम धरती को छोड़कर चाँद पे क्यों रहते है? मंगल- हसँस्काइहबाबाक्सओडब्नवकक.. प्लूटो- पापा, पापा..ज़रा हिंदी लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करे वरना ऑडियंस को समझ नही आएगी...हमारी ज़ीआशा भाषा इनके समझ नही आएगी और अगर आई तो बाकी भाषाओ की तरह इसे भी हिंदी में मिक्स करदेंगे ये (हस्ता है) मंगल- कैकेवस्जज़ी.. हाँ, हाँ । चाँद पर तेरे मामा का घर है और तेरी मम्मी का पीयर प्लूटो- पर मम्मी तो धरती पर रहती थी ना वो तो इंसान है ना? तो? आप उनसे कैसे मिले? मैं कैसे हुआ? मैं तो आधा इंसान , आधा आप जैसा हुँ , तो? बताओ ना पापा मंगल- हे भगवान, एक तो इसकी माँ मेले में चली गई इसको मेरे पास छोड़ कर और ये धरती का कीड़ा मेला यहां भी लग गया , सेल सेल के लालच में मेरा सारा कचरा कचरा खर्च करने चली गई.. प्लूटो- पापा मुझे आपकी लव स्टोरी सुनाओ ना मंगल-- इतना वक्त नही है प्लूटो- तो शार्ट में सुना दो मंगल-- ये फिलमी लाइने नाटको में नही चलती बेटा...ठीक है सून मैं और मेरे दोस्त गोआ का सपना लिए मार्स से धरती पर जाने की ज़िद करने लगे , तेरे सूरज दादा ने साफ मना करदिया तो हम ...