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"मेंन्नू की" - कविता

अर्थ के भी अर्थ होते है अधुरे शब्दो को जो पुरा करे... मेन्नू की तेन्नू की सान्नू की मेन्नू की ,जो किसी और के लिए जाऊ.. तेन्नू की, मरता है तो मर जाए और अपन काहे वक्त जलेए सान्नू की, कल मरता है तो आज मर जाए क्योंकि , जब उसने चाहा था जीना नाम ने बोला कि इसे मरना हे या जीना कौन जनता हे ये फिर्से होगा नही? मै जानता हू ये होगा ही होगा ही , होगा ही और हमे तब कहना है कि मेन्नू ही , तेन्नू ही , सान्नू ही.. -पियूष गुरुनानी

मर्ज़ी आपकी है - कविता

शायद सुबह इसलिय होती है की रात को को जो ख्वाब देखे है उन्हे हकिकत मे बदल सके, मर्ज़ी आपकी है, शायद आँखे खुलने से ख्वाब नही टुटते टुटे है या नही?मर्ज़ी आपकी है, ये शायद सही है या गलत मर्ज़ी आपकी है मर्ज़ी "आप ही" की है... -पियूष गुरुनानी