शायद सुबह इसलिय होती है
की रात को को जो ख्वाब देखे है
उन्हे हकिकत मे बदल सके,
मर्ज़ी आपकी है,
शायद आँखे खुलने से ख्वाब नही टुटते
टुटे है या नही?मर्ज़ी आपकी है,
ये शायद सही है या गलत
मर्ज़ी आपकी है
मर्ज़ी "आप ही" की है...
-पियूष गुरुनानी
की रात को को जो ख्वाब देखे है
उन्हे हकिकत मे बदल सके,
मर्ज़ी आपकी है,
शायद आँखे खुलने से ख्वाब नही टुटते
टुटे है या नही?मर्ज़ी आपकी है,
ये शायद सही है या गलत
मर्ज़ी आपकी है
मर्ज़ी "आप ही" की है...
-पियूष गुरुनानी
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