बपल भर की रेत सी ज़िंदगी मे पल भर की मज़ेदार ज़िंदगी, के वो शान्त पानी की तरह वो दिन आज इस पानी के तरह है वो दिन, इन लहरो या झुन्झ्ते पानी की तरह आज भी याद हे मुझे वो दिन जब दिन रात से चोरी से मिलने आता था जब नीला आसमान पानी मे उतर जाता था तब सोने सी धुल का जादू पानी पे चलता था मन करता है जैसे तोड दू ये शीशा ही क्युकी आज भी रहता हू मे वही और खो जाऊ फिरसे उन दिन मे मगर वक़्त और हालत से मजबुर मे, पर जब सब ठीक होगा और मे तुम्हे ना मिलु तो मुझे कही मत खोजना मे यही पर बेठा होंगा... -पियुष गुरुनानी🎭