"पगला"
-पियूष गुरुनानी
पात्र परिचय
शम्भू- एक पागल जो 80 वर्ष का है पर हरकते 8 साल के बच्चे की तरह है
अन्थोनी- पागल खाने का डॉक्टर , उम्र 32
रोस- अन्थोनी की पत्नी व नर्स , उम्र 32
***
शम्भू (हस्ता है) : शशशशशश.. किसको बोलना मत , में यहां छूपा हुँ वरना वो मुझे ले जाकर करंट देंगे , बहुत
ज़ोरदार करंट देते है , पता नही कहा से लाते है पर मैंरे शरीर के सारे बाल खड़े हो जाते है । शुरू में तो बहुत अच्छा लगता है जैसे कोई बर्फ की सिल्ली पर लेटा कर गरम गरम गैस पर तल रहा हो मुझे ,जैसे भझिए तलते है । पर फिर बाद में ऐसा लगता है जैसे डरावने खुल्ल्ले आसमान में कंगारू की गौद में स्कूबा डाइविंग कर रहा हूँ , नही बाबा नही नही.. मुझे पानी से बहुत डर लगता है । इतना ज़ुल्म कौन करता है? वो डॉक्टर अन्थोनी और नर्स रोस...
शम्भू: और रोस आंटी कैसी हो? आज करेंट मत दोना प्लीज़!
रोस- माय गॉड जीसस !! तुम्हे कितनी बार बोला है मुझे उंटी मत बोला करो... सी हनी ये बुढ्ढा हमको उंटी बोलता है
अन्थोनी: उ इडियट मैन , ये बूढ़ी तुमको कहा से औरत लगती है? मेरा मतलब था कि बुड्ढे, ये औरत तुमको कहा
से आंटी दिखती है? आज तक मेरी हिम्मत नही हुई ये कहने की.. (रोस अन्थोनी का गला पकड़ लेती है).. मैं तो.. मैं तो मज़ाक कर रहा था डार्लिंग..
रोस (उसका गला छोड़कर) :तुम्हे तो मैं पसंद ही नही हूँ , तुम मुझसे प्यार ही नही करते क्योंकि मैं मोटी हुँ..
अन्थोनी: बात तो सही कही तुमने
शम्भू- हाँ हाँ , सही बात है...इसे नर्स दिलरुबा पसंद है!!
रोस: हाँ?... मुझे पता है तुम्हे वो नर्स दिलरुबा पसंद है.. हेना? मैं तुम्हरी उससे शादी करवा दूंगी और तुमसे हमेशा के लिए दूर चली जाउंगी !
अन्थोनी: शादी करवा ही रही हो तो डॉक्टर मैरी से ही करवा दो.. (रोस फिर उसका गला पकड़ लेती है) अरे सुनो तो डार्लिंग...
शम्भू: देखा मैने कैसे इनके बीच लड़ाई करवादी । कभी वो उसको हाथो में उठाकर फेकती , कभी बालो से पंखा बनाकर घुमाती , अब क्या करे गर्मी बहुत हेना...और अन्थोनी फटे हाल होकर उसके पाव में बैठकर भीख मांगता ... और मैं चुप-चाप दबे पांव उन्हें बोलकर निकल गया कि मैं भाग रहा हूँ , (गाना गाता है खुश होकर) याहू याहू
चाहे कोई मुझे जंगली
कहे केहने दो जी , कहते रहे
हम प्यार के तुफानो में गिरे
हम क्या करे
याहू याहू
.. इतनी सावधानी के बाद भी उन्हें पता नही कैसे पता चल गया?? ताज्जुब की बात है..खेर फिर भी वो मुझे पकड़ नही पाए और मैं मेरे खिलोने लेकर केमिकल रूम में छुप गया और वहा बहुत सारे प्रकार के जूस भी पिए निले , पिले , लाल.. और डायपर बदलकर , सोचा की ज़िंदगी कितनी कठीन है , अब मुझे भी बड़ा हो जाना चाहिए... पर खीलोंनो से भी खेलना चाहिए ...तभी वो लोग आ गए.. नही नही मुझे करंट नही खाना ( करंट खाता है दुख में) एक मीन...नही नही मुझे करंट नही खाना और पता है उन्होंने उन्होंने फिर फिर मुझे करंट दिया , हेना चौकाने वाली बात
( करेंट खाता है मज़े में)
**समाप्त**
Performance link - https://youtu.be/nr4zlKhalM8
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