"सफर"
-पियूष गुरुनानी
फिर वही एक कहानी शुरू होती है...
मैं ज़फर हूँ , मुझे उसका हाल देखकर बुरा लगा और गुस्सा भी आया कि प्यार में लोग पागल क्यों हो जाते है इसलिए मैंने सोचा कि मैं प्यार कभी नही करूँगा ।
और अगले ही दिन पतंग उड़ाते वक्त एक लड़की दिखी , उसकी पतंग मेरे छत के कोने पर अटक गई थी , , मैने जैसे ही पतंग छुड़ाकर , कन्नी दी । और उसे देखा - सलवार-कमीज़ पहने , खुले बाल , आँखों मे सुरखे तेज़ काजल ।
प्यार में कहते है शरीर गरम हो जाता है , पेट मे जैसे तितलिया आ आ जाती है , दिल ज़ोर से धड़कता है पीछे गाने बजते है । मगर सबसे पहले आँखे बोलती है कि कौन किस से कितना प्यार करता है । ये सब स्लो-मोशन या फ़ास्ट-फॉरवर्ड में हो रहा था , पता नही । पर में झट से छत से गिरा पर धीरे-धीरे उसे देखते हुए ।
हाय लग गई , उसके सारे दोस्त मुझ पर हस रहे थे मगर वो नही , जैसे उसे मेरी परवाह हो और मैं भी दर्द में मुस्करा गया
मैं राह बनाते चल गया...
****
फिर वही एक कहानी शुरू होती है...
मैं ज़फर हूँ , मुझे उसका हाल देखकर बुरा लगा और गुस्सा भी आया कि प्यार में लोग पागल क्यों हो जाते है इसलिए मैंने सोचा कि मैं प्यार कभी नही करूँगा ।
और अगले ही दिन पतंग उड़ाते वक्त एक लड़की दिखी , उसकी पतंग मेरे छत के कोने पर अटक गई थी , , मैने जैसे ही पतंग छुड़ाकर , कन्नी दी । और उसे देखा - सलवार-कमीज़ पहने , खुले बाल , आँखों मे सुरखे तेज़ काजल ।
प्यार में कहते है शरीर गरम हो जाता है , पेट मे जैसे तितलिया आ आ जाती है , दिल ज़ोर से धड़कता है पीछे गाने बजते है । मगर सबसे पहले आँखे बोलती है कि कौन किस से कितना प्यार करता है । ये सब स्लो-मोशन या फ़ास्ट-फॉरवर्ड में हो रहा था , पता नही । पर में झट से छत से गिरा पर धीरे-धीरे उसे देखते हुए ।
हाय लग गई , उसके सारे दोस्त मुझ पर हस रहे थे मगर वो नही , जैसे उसे मेरी परवाह हो और मैं भी दर्द में मुस्करा गया
मैं राह बनाते चल गया...
****
Comments
Post a Comment