Story 12
" मलंग "
-पियूष गुरुनानी.
मैं कमली , मैं और मेरे दोस्त , यहां मैसूर में
इस पहाड़ पर कैंपिंग के लिए आए है , जहाँ बाकी दूसरे लोग भी है -...बारिश का मौसम है , और पहाड़ के नीचे एक बड़ी नदी है , तभी मुझे एक लड़का दिखा..."मलंग".... दिन खत्म हो चुका था और रात शुरू नही हुई थी , वो सुन्हेरा पल था , it was a magic hour..उसके लंबे बालों में रोशनी फेल रही थी और उसका प्यार चेहरा चमक रहा था , उसने मेरी आँखों मे देखा , इत्तफाक से हम दोनों की आंखे नीली है और
और झट उसने मेरा हाथ पकड़ कर...नदी में छलांग लगादी
पता नही ये सब अचानक क्या हो रहा था , हम तेज़ी से नीचे गिर रहे थे पर न वो डरा और ना मैं, पर सब धीरे-धीरे महसूस हो रहा था, जैसे हम एक दूसरे को कई जन्मों से जानते हो , कुछ अधूरा था , वो प्यार , वो लड़ाई , वो बिछड़ना सब दिख रहा था , ...वो बिल्कुल मेरी तरह मस्त मौला है...
गिरते ही हम पानी की गहराइयो में चले गए , मुझे तैरना नही आता था , उसने मेरा हाथ अब तक नही छोड़ा था और और हम तैरते गए, वो पानी की ठण्डक , वो प्यारी मछलियाँ , वो खूबसूरत दुनिया...ये सब मैने कभी महसूस नही किया था...उसकी सासे भी यही सब कह रही थी...
हम जब पानी के ऊपर आए तो अंधेरा हो चुका , उस दिन पूर्णिमा थी , चाँद काफी बड़ा और सुंदर लग रहा था और उसका साथ भी , तारो की चाँदनी चारो ओर फैल गई और हमने अब तक एक दूसरे से कुछ नही कहा था , उसने मेरी ज़ुल्फो को पीछे सवारकर , मेरे होठों को चूम लिया और समय गुज़रता चला गया , जैसे वही सब दोहरा रहा हो कई जन्मों से और यही रीत है...
जन्म , प्यार और मरण
****
Thank you , this is a last story of this session❤️
" मलंग "
-पियूष गुरुनानी.
मैं कमली , मैं और मेरे दोस्त , यहां मैसूर में
इस पहाड़ पर कैंपिंग के लिए आए है , जहाँ बाकी दूसरे लोग भी है -...बारिश का मौसम है , और पहाड़ के नीचे एक बड़ी नदी है , तभी मुझे एक लड़का दिखा..."मलंग".... दिन खत्म हो चुका था और रात शुरू नही हुई थी , वो सुन्हेरा पल था , it was a magic hour..उसके लंबे बालों में रोशनी फेल रही थी और उसका प्यार चेहरा चमक रहा था , उसने मेरी आँखों मे देखा , इत्तफाक से हम दोनों की आंखे नीली है और
और झट उसने मेरा हाथ पकड़ कर...नदी में छलांग लगादी
पता नही ये सब अचानक क्या हो रहा था , हम तेज़ी से नीचे गिर रहे थे पर न वो डरा और ना मैं, पर सब धीरे-धीरे महसूस हो रहा था, जैसे हम एक दूसरे को कई जन्मों से जानते हो , कुछ अधूरा था , वो प्यार , वो लड़ाई , वो बिछड़ना सब दिख रहा था , ...वो बिल्कुल मेरी तरह मस्त मौला है...
गिरते ही हम पानी की गहराइयो में चले गए , मुझे तैरना नही आता था , उसने मेरा हाथ अब तक नही छोड़ा था और और हम तैरते गए, वो पानी की ठण्डक , वो प्यारी मछलियाँ , वो खूबसूरत दुनिया...ये सब मैने कभी महसूस नही किया था...उसकी सासे भी यही सब कह रही थी...
हम जब पानी के ऊपर आए तो अंधेरा हो चुका , उस दिन पूर्णिमा थी , चाँद काफी बड़ा और सुंदर लग रहा था और उसका साथ भी , तारो की चाँदनी चारो ओर फैल गई और हमने अब तक एक दूसरे से कुछ नही कहा था , उसने मेरी ज़ुल्फो को पीछे सवारकर , मेरे होठों को चूम लिया और समय गुज़रता चला गया , जैसे वही सब दोहरा रहा हो कई जन्मों से और यही रीत है...
जन्म , प्यार और मरण
****
Thank you , this is a last story of this session❤️
Comments
Post a Comment