"Blossom"
-Piyush gurunani
Principal ने उसे नही बुलाया था , वो लड़का झूठ बोलकर उसे साथ ले गया और कुछ दिन बाद वो चली गई दूसरे शहर , अपने घर , शायद वो लड़का भी साथ गया था क्योंकि दोनों का घर एक ही शहर में है। नही , वो दोनों अलग-अलग है , अलग-अलग है , "साथ नही है"...भेंछोद! तुझे समझ नही आता? अलग-अलग-अलग...
को कब से खुद से ही बात कर रहा था और कुछ देर बाद वीडियो गेम खेलने लग गया , उसके रूम मेट्स भी घर जा चुके थे , वो घर नही गया- अब कोई लगाव बाकी न था ।
सिर्फ उससे मिलने की तमन्ना लिए , अपना गांजा खत्म कर , ब्लॉसम खेलते खेलते वही धै हो गया ।
उठा तो मिला अपने अंदर के रूप से , अपनी उम्र से दुगना । पाया अब वो , अब वो "एक कार्टून करैक्टर" बन चुका है । मगर उसने उससे मिलने की ठानी थी , वो उस पेड़ के नीचे आई थी ।
"वक्त शायद बेवक्त सा हो गया था ,
या शायद ये फासलों के दरमियाँ था"
वो भागता रहा , उस तक पहुँचने के लिए , उसे पाने के लिए , घड़ी भी जैसे भाग रही हो , उसकी उम्र बढ़ती जा रही थी... पर उसे मिलना था , मिलना है....
उसे रोकना चाहिए था , रोकना- हाँ रोकना , रोकना है । क्या , वो रियलिटी में जी रहा था या ये महज सिर्फ एक खेल है ।
लेवल बढ़ते जा रहे थे , ये 5th लेवल था उसकी सब लाइफलाइन खत्म हो चुकी थी , वो कही खड़ी थी उस गुलाबी पेड़ के नीचे , वो भागता उस तक पहुच ही गया था कि उसे चूमकर या गले लगा या छूकर या सिर्फ बोलकर कि " तुम मेरी हो" या या या उसकी आँखों मे देख लू और बस....
"फिज़ाओ में प्यार है,
बस एक कश मेरे नसीब का सही"
बस हवा का कश लेकर , मार जाऊ , वो गिर पड़ा , वो बेहोश था
वो सो रहा था वही , वो देख रही थी , उसे मिलना था , वो इंतज़ार कर रही है उस पेड़ के नीचे...
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