Story -9
" रासलीला "
" रासलीला "
- Piyush gurunani
उसने शादी नहीं की, उसकी नौकरी चली गई , शायद उसे इस बात का कोई अफसोस ही नहीं था... सब सड़के बंद है...वो मिल नहीं सकते क्योंकि दूरी ज्यादा है , बात वो उससे कर सकता था मगर एक सुरीली सी मीठी मुलाकात जरूरी है , सुकून के लिए, उसकी गहरी सांसे मानो सुर्ख नरम-गरम मधुर हो गई , दिल के पास उसकी तस्वीर लिए वो दोनों रसीले स्वप्न में मग्न हो गए....
वो मिले पर रूह के शरीर से बने हुए , पय से कोमल सफेद , ना आँख , ना मुंह , ना कान... सिर्फ तुम्हारा और मेरा अंतर्मन जो दुनिया की हर खुशी गम और अन्य भागों को पीछे छोड़ आया है, सिर्फ तुमसे प्रेम करने बिना किसी भाषा के...
हाथ पकड़े हम उड़ चले कि
नीचे पांव से तारे बरसते चले
गोल सी धरा में डुबकी
लगाकर सब पार करते चले
वो उपवन भी महक उठा
गुलाबी शरबत के घोल सा
हर एक भूमि करते चले रसीली...
चांद पर लेट कर हमने जब देखा
सारा ब्रह्मांड ही गुलाबी हो चला था
ये सब जब हो रहा था
वो मुझ में , मैं उसमें खो रहा था
और बात करें चांद की
तो वो भी गुलाबी रंग सोख रहा था
नशा उसे भी धीरे-धीरे चढ़ रहा था
हम दोनों वही एक दूसरे की
रूह से सिमटे सो गए
बिना किसी दूरी या अंतर के
उसकी नींद भोर को खुली , एक हल्की उल्लास भरी मुस्कुराहट के साथ सामान बांधा और चल पड़ा उसके शहर...
उसने शादी नहीं की, उसकी नौकरी चली गई , शायद उसे इस बात का कोई अफसोस ही नहीं था... सब सड़के बंद है...वो मिल नहीं सकते क्योंकि दूरी ज्यादा है , बात वो उससे कर सकता था मगर एक सुरीली सी मीठी मुलाकात जरूरी है , सुकून के लिए, उसकी गहरी सांसे मानो सुर्ख नरम-गरम मधुर हो गई , दिल के पास उसकी तस्वीर लिए वो दोनों रसीले स्वप्न में मग्न हो गए....
वो मिले पर रूह के शरीर से बने हुए , पय से कोमल सफेद , ना आँख , ना मुंह , ना कान... सिर्फ तुम्हारा और मेरा अंतर्मन जो दुनिया की हर खुशी गम और अन्य भागों को पीछे छोड़ आया है, सिर्फ तुमसे प्रेम करने बिना किसी भाषा के...
हाथ पकड़े हम उड़ चले कि
नीचे पांव से तारे बरसते चले
गोल सी धरा में डुबकी
लगाकर सब पार करते चले
वो उपवन भी महक उठा
गुलाबी शरबत के घोल सा
हर एक भूमि करते चले रसीली...
चांद पर लेट कर हमने जब देखा
सारा ब्रह्मांड ही गुलाबी हो चला था
ये सब जब हो रहा था
वो मुझ में , मैं उसमें खो रहा था
और बात करें चांद की
तो वो भी गुलाबी रंग सोख रहा था
नशा उसे भी धीरे-धीरे चढ़ रहा था
हम दोनों वही एक दूसरे की
रूह से सिमटे सो गए
बिना किसी दूरी या अंतर के
उसकी नींद भोर को खुली , एक हल्की उल्लास भरी मुस्कुराहट के साथ सामान बांधा और चल पड़ा उसके शहर...
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