स्टाइलिश गोलू
- पियूष गुरुनानी
(गोलू , एक 6 साल का लड़का बासवाड़ा गाँव का एक भोला सा बच्चा है। घर शहर ले पास होने के कारण उनके गाँव मे भी "फेशनेबल " बनने का चस्का चड़ा है और उसीका एक शिकार है गोलू। बचपन से ही उसकी माँ अच्छे से तैयार करके ही बाहर जाने देती है , वक्त और शहर की महरबानी से उसका ये चस्का बड़ता चला गया)
(नेपथ्य से आवाज़े आती है)
गोलू- ( माँ उसे तैयार कर रही है) माँ, मेरा पौडर?..
माँ मेरा चचमा? (चश्मा)... मेरी गादी?(गाड़ी)
(अब तैयार है , गाड़ी लेकर घर से निकलता है जो एक डोर से बंधि है जो गोलू के हाथ मे है और पिछे गाड़ी सड़क पर गिसड़ रही है)(गाड़ी गोलू ने खुद बनाई है एक लकड़े के पाटिए और कुछ बोतलो के ढक्कनो से)
(अचानक गुड्डू जो 14 साल का है वो गोलू की गाड़ी पिछे से रोक देता है , गोलू धच्के से रोकता है )
गोलू- (पिछे मुड़कर) मेरी गादी , ऐ...ये मेरी गादी है..(तभी गुड्डू उसका चश्मा भी छीन लेता है) ऐ...ये मेरा चचमा है , देदे?
(गुड्डू उसपर चिलाता है और मना कर देता है और गोलू को रोने की अवस्था मे है पर रोता है नही है ,ऐसे लग रहा है वो हारकर घर लोट रहा है) (धीरे- धीरे प्रकाश कम हो रह है , लगभग हो ही गया है जैसे नाटक खत्म हो ही गया...)
(पर अचानक से गोलू जाते जाते ज़मींन से भाटा उठा लेता है) (पुरा प्रकाश)
गोलू- दे , मेरी गादी दे , मेरा चचमा दे...देदे ( गुड्डू डर जाता है पर फिर भी मना कर देता है) (गोलू गुस्से और भय मे उसे भाटा मार देता है जो उसके सिर पर लगा है , वो घर भागता है)
गोलू- ( भागते हुए , विंगस मे) माँ , माँ ...
(फ़ेड आउट)
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- पियूष गुरुनानी
(गोलू , एक 6 साल का लड़का बासवाड़ा गाँव का एक भोला सा बच्चा है। घर शहर ले पास होने के कारण उनके गाँव मे भी "फेशनेबल " बनने का चस्का चड़ा है और उसीका एक शिकार है गोलू। बचपन से ही उसकी माँ अच्छे से तैयार करके ही बाहर जाने देती है , वक्त और शहर की महरबानी से उसका ये चस्का बड़ता चला गया)
(नेपथ्य से आवाज़े आती है)
गोलू- ( माँ उसे तैयार कर रही है) माँ, मेरा पौडर?..
माँ मेरा चचमा? (चश्मा)... मेरी गादी?(गाड़ी)
(अब तैयार है , गाड़ी लेकर घर से निकलता है जो एक डोर से बंधि है जो गोलू के हाथ मे है और पिछे गाड़ी सड़क पर गिसड़ रही है)(गाड़ी गोलू ने खुद बनाई है एक लकड़े के पाटिए और कुछ बोतलो के ढक्कनो से)
(अचानक गुड्डू जो 14 साल का है वो गोलू की गाड़ी पिछे से रोक देता है , गोलू धच्के से रोकता है )
गोलू- (पिछे मुड़कर) मेरी गादी , ऐ...ये मेरी गादी है..(तभी गुड्डू उसका चश्मा भी छीन लेता है) ऐ...ये मेरा चचमा है , देदे?
(गुड्डू उसपर चिलाता है और मना कर देता है और गोलू को रोने की अवस्था मे है पर रोता है नही है ,ऐसे लग रहा है वो हारकर घर लोट रहा है) (धीरे- धीरे प्रकाश कम हो रह है , लगभग हो ही गया है जैसे नाटक खत्म हो ही गया...)
(पर अचानक से गोलू जाते जाते ज़मींन से भाटा उठा लेता है) (पुरा प्रकाश)
गोलू- दे , मेरी गादी दे , मेरा चचमा दे...देदे ( गुड्डू डर जाता है पर फिर भी मना कर देता है) (गोलू गुस्से और भय मे उसे भाटा मार देता है जो उसके सिर पर लगा है , वो घर भागता है)
गोलू- ( भागते हुए , विंगस मे) माँ , माँ ...
(फ़ेड आउट)
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