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Showing posts from February, 2022

नींद - कविता

नींद नही आती रातो में बंद-खुली आँखों मे सुकून तो तब मिलेगा जब धड़कन साँसे चुराएगी जब खुसबू लोरी सुनाएगी जब धूल चादर उड़ाएगी... - पियूष गुरुनानी

Fall Up - mini story

Lights fade away from a ball of rice to a shinny ball , a news came that a person died. She travels beneath the sand ball to airy water and knows the truth & suddenly felt falling from the sky. She wakes up after practising death... -Piyush gurunani

चौर पानी - कविता

कविता- चौर पानी पानी भी चोर है साला.. एक ओर, शहर चुराए बेठा है, दिन मे आसमान और रात मे पुरा ब्रम्हांड चुराए बेठा है... -पियूष गुरुनानी

Somras - a short play in hindi

"सोमरस" -पियूष गुरुनानी पत्र परिचय-  टिंकू- 8 वर्ष का छोटा बच्चा जो तोतला है । बिंदु- टिंकू की बड़ी बहन , उम्र 22 के करीब । बिल्लू शराबी- उम्र 80 । ●●● टिंकू (उत्तेजित) : अंकल , ओ अंकल ये चालू कब होगा?...अच्छा आज मैं बहुत क्रेजी स्टोरी सुनाऊंगा ,अरे क्रेजी मतलब पागलपन , सुनाई कम देता है क्या?...हाँ, बेस्ड ऑन ट्रू इवेंट्स (भयानक स्वर में)...एसा कुछ नही है वो अपनी बिंदु दीदी हेना , मतलब मेरी , उनका हाल ही में ब्रेकअप हो गया , दीदी बहुत रोइ फिर बोली चल टिंकू मेरे साथ और वो मुझे शराब की दुकान पर ले गई और मुझे पैसे देकर बोली "जा एक बोटल ले आ और बचे हुए तु रख लेना पर मम्मी-पापा को कुछ मत बोलना" और में गया और बोटल मांगी तो दुकान दार मुझे बचा बोलकर हँसने लगा.. ए हस्ता क्या है? मुझे बच्चा मत समझ मुझे सब पता है मुझे हाँ हेवार्डस 500 , 100 पिपर्स , ओल्ड मंक , रेड लेबेल , ब्लैक लेबेल , रॉयल स्टैग...और उसने मुझे बोटल देदी और वही दुकान के बाहर ही बोटल खोलकर पूरी पी गई और थोड़ी छोड़ दी , कुछ ही देर में डीडी को चड़ गई और ये चिकन वाले भी बगल में दुकान खोलकर बैठ गए अब डीडी ने चिकन लेने क...

Somnaath - a short play in hindi

"सोमनाथ" -पियूष गुरुनानी युति- मने कुछ हमज नी आई रिओ है , कटे जावा , अटे थो सब शु शु करे है वेन्डा गुजराती पीटर- तो फिर हम क्यों गुजरात घूमने आए युति- अबार ढबझा ...ओ भाई साहब भावेश- शु? म ने काई कीधू तमे?….. हु एकदम मजामा हॉ ने । युति- कई, कई, कई पीटर(बिच मे बोलता हुआ) - एक्चुअली वी वांट योर हेल्प अस वी आर टूरिस्ट , सो... भावेश- तमने शू तकलीफ़ छे भाई? युति- आपणे हमारी बातां हमज नी आईरिए? भावेश- भावेश - शु? मने काई कीधू तमे?….. हु एकदम मजामा हॉ ने । भावेश - तमने शू तकलीफ़ छे भाई? भावेश : मारे तारी जोड़े वात नथी करवी , हु जिग्नेश , सुरेश , मुकेश नथी , भावेश छू , पूरे पुरो गुजराती ए भी सूरत नो , अमे बाजू मा अज़ रहिए एटले तमार हाल चाल तो आवता जता पूछता अज आविए...ना समझया? हु भावेश पटेल , मने ढोकला , फाफड़ा अने हांडवो बऊ भावे.. क्यारेक आवजो घरे ...। मने ठंडू गमतु नथी, अमनें चालवु बहू गमे नहीं एटले अज़ एमे बिजनेस करिए। तमे क्याथी ? नाटक मंडली थी छो ? एक नाटक करीने कातो , एक गीत गाईने बतावो ने... (Sanedo-sanedo song) युति- अबारने , भघि जा । युति(भावे...

Pagla - a short play in hindi

"पगला" -पियूष गुरुनानी पात्र परिचय शम्भू- एक पागल जो 80 वर्ष का है पर हरकते 8 साल के बच्चे की तरह है अन्थोनी- पागल खाने का डॉक्टर , उम्र 32 रोस- अन्थोनी की पत्नी व नर्स , उम्र 32 *** शम्भू (हस्ता है) : शशशशशश.. किसको बोलना मत , में यहां छूपा हुँ वरना वो मुझे ले जाकर करंट देंगे , बहुत ज़ोरदार करंट देते है , पता नही कहा से लाते है पर मैंरे शरीर के सारे बाल खड़े हो जाते है । शुरू में तो बहुत अच्छा लगता है जैसे कोई बर्फ की सिल्ली पर लेटा कर गरम गरम गैस पर तल रहा हो मुझे ,जैसे भझिए तलते है । पर फिर बाद में ऐसा लगता है जैसे डरावने खुल्ल्ले आसमान में कंगारू की गौद में स्कूबा डाइविंग कर रहा हूँ , नही बाबा नही नही.. मुझे पानी से बहुत डर लगता है । इतना ज़ुल्म कौन करता है? वो डॉक्टर अन्थोनी और नर्स रोस... शम्भू: और रोस आंटी कैसी हो? आज करेंट मत दोना प्लीज़! रोस- माय गॉड जीसस !! तुम्हे कितनी बार बोला है मुझे उंटी मत बोला करो... सी हनी ये बुढ्ढा हमको उंटी बोलता है अन्थोनी: उ इडियट मैन , ये बूढ़ी तुमको कहा से औरत लगती है? मेरा मतलब था कि बुड्ढे, ये औरत तुमको कहा से आंटी दिखती है? आज तक मेरी हिम...

Happy - a short hindi play

"हैप्पी" -पियूष गुरुनानी हैप्पी- हेल्लो ! मेरा नाम हैप्पी है , उम्र 7 साल.. नही नही 8 क्योंकि आज हेना मेरा हैप्पी वाला बर्थडे है मतलब हैप्पी बर्थडे है.. पर किसी को याद ही नही है । ना पापा को , ना मम्मा को... मुझसे तो कोई प्यार ही नही करता , मैं तो घर छोड़कर ही भाग जाऊंगा फिर खुदका बंगला और गाड़ी लूँगा फिर वही रहूँगा और पढ़ाई भी नही करनी पड़ेगी.. ये ( चिल्लाता है) मम्मी- अरे क्या हुआ नालायक क्यों चिल्ला रहा है! हैप्पी- कुछ नही! (सड़ा सा मु बनाकर) मम्मी- (नाटक करते हुए जैसे उन्हें कुछ पता ही नही) क्या हुआ मेरे बाबू को हाँ, बोलो बोलो हैप्पी- मुझसे तो कोई प्यार ही नही करता! मम्मी- एसा किसने बोला हाँ , बोलो ना क्या हुआ आपको? हैप्पी- मैं जब पैदा हुआ था तब आप खुश हुए थे? मैं आपका ही बेटा हुना? ये मेरा स्कूल कार्ड है इसमें तारिक देखो!!...मैं तो जा रहा हूँ, मुझसे तो कोई प्यार ही नही करता... मम्मी- (हस्ते हुए) अरे राजा सुन तो, अरे... हैप्पी- अब तो मैं घर छोड़कर कल सुबह ही निकल जाऊंगा दूर कही... मेरी भी इच्छा होती है मेरा भी बर्थडे मने , मेरे भी दोस्त घर आए ,मैं केण्डल भुज...

Stylish Golu - play in hindi

स्टाइलिश गोलू - पियूष गुरुनानी (गोलू , एक 6 साल का लड़का बासवाड़ा गाँव का एक भोला सा बच्चा है। घर शहर ले पास होने के कारण उनके गाँव मे भी "फेशनेबल " बनने का चस्का चड़ा है और उसीका एक शिकार है गोलू। बचपन से ही उसकी माँ अच्छे से तैयार करके ही बाहर जाने देती है , वक्त और शहर की महरबानी से उसका ये चस्का बड़ता चला गया) (नेपथ्य से आवाज़े आती है) गोलू- ( माँ उसे तैयार कर रही है) माँ, मेरा पौडर?.. माँ मेरा चचमा? (चश्मा)... मेरी गादी?(गाड़ी) (अब तैयार है , गाड़ी लेकर घर से निकलता है जो एक डोर से बंधि है जो गोलू के हाथ मे है और पिछे गाड़ी सड़क पर गिसड़ रही है)(गाड़ी गोलू ने खुद बनाई है एक लकड़े के पाटिए और कुछ बोतलो के ढक्कनो से) (अचानक गुड्डू जो 14 साल का है वो गोलू की गाड़ी पिछे से रोक देता है , गोलू धच्के से रोकता है ) गोलू- (पिछे मुड़कर) मेरी गादी , ऐ...ये मेरी गादी है..(तभी गुड्डू उसका चश्मा भी छीन लेता है) ऐ...ये मेरा चचमा है , देदे? (गुड्डू उसपर चिलाता है और मना कर देता है और गोलू को रोने की अवस्था मे है पर रोता है नही है ,ऐसे लग रहा है वो हारकर घर लोट रहा है) (धीरे- ध...

मंगल - (लघु नाटक)

"मंगल" -पियूष गुरुनानी प्लूटो- पापा , हम धरती को छोड़कर चाँद पे क्यों रहते है? मंगल- हसँस्काइहबाबाक्सओडब्नवकक.. प्लूटो- पापा, पापा..ज़रा हिंदी लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करे वरना ऑडियंस को समझ नही आएगी...हमारी ज़ीआशा भाषा इनके समझ नही आएगी और अगर आई तो बाकी भाषाओ की तरह इसे भी हिंदी में मिक्स करदेंगे ये (हस्ता है) मंगल- कैकेवस्जज़ी.. हाँ, हाँ । चाँद पर तेरे मामा का घर है और तेरी मम्मी का पीयर प्लूटो- पर मम्मी तो धरती पर रहती थी ना वो तो इंसान है ना? तो? आप उनसे कैसे मिले? मैं कैसे हुआ? मैं तो आधा इंसान , आधा आप जैसा हुँ , तो? बताओ ना पापा मंगल- हे भगवान, एक तो इसकी माँ मेले में चली गई इसको मेरे पास छोड़ कर और ये धरती का कीड़ा मेला यहां भी लग गया , सेल सेल के लालच में मेरा सारा कचरा कचरा खर्च करने चली गई.. प्लूटो- पापा मुझे आपकी लव स्टोरी सुनाओ ना मंगल-- इतना वक्त नही है प्लूटो- तो शार्ट में सुना दो मंगल-- ये फिलमी लाइने नाटको में नही चलती बेटा...ठीक है सून मैं और मेरे दोस्त गोआ का सपना लिए मार्स से धरती पर जाने की ज़िद करने लगे , तेरे सूरज दादा ने साफ मना करदिया तो हम ...

कविता - मुस्कुराहट ( भारत देश)

●कविता-मुस्कराहट -पियूष गुरुनानी हर मुस्कराहट के पीछे खुशी का होना ज़रूरी नही...  खून के कतरे से क्या सफल होगा क्या जतन तुमरा जब सब जल जाए, तब पूछना.. क्या ये है , वतन हमारा?

कविता - आँखों का अंधेरा

●कविता-आँखो का अन्धेरा -पियूष गुरुनानी जब भी आँख बन्द करते हो... मे दिखता हूँ तुम्हे अन्धेरे के समय बन्द आँखो के समय हल्की काली लकीरे दिखेंगी तुम्हे जो होगी बारीक सेवइए जेसी उसमे दूर तक देखने की कोशिश करना उसमे सब मिलेगा पेड़-पौधे ,झरना बोलती चमडी वाले जानवर भी होगें.. थोडा और दूर देखना... तुम अकेले खडे होगे अगर जल्द ही उजाला नही मिला, तो उसी से अपने अन्धेरे को भरना, लेकिन ध्यान रखना एक चीज़ बस वहा खो मत जन हमेशा के लिए... 

"कामचोर " (हास्य बाल कविता)

कामचोर -इस्मत चुगताई (कहानी) -पियूष गुरुनानी (कविता) वाद-विवाद चल रह था हमारा सुस्ताना उन्हे खल रह था नौकरो को बुझा कर दिया हमको काम मे मखमोर कर दिया बोला उठकर पानी पिलो सिर्फ पानी पीकर चेन से जिलो सबने मटका हाथ मे उठाया कभी इधर से धक्का आया कभी उधर से धक्का आया अंत मे अम्मा ने हमे गिला पाया फिर वो बोले कामचोर कही के, ये तो कामचोर है कामचोर कही के , ये तो कामचोर है लगता है वो हमारे काम से खुश है बोलिए-बोलिए और क्या-क्या काम है बोलिए किस काम का क्या दाम है पहले दरी उठाकर दौड़ लगाई फिर करदी छड़ी से उसकी धुलाई ईद आई, ईद आई मगर खिर नही, धूरि आई पिटाई लगाई गई फिर झाड़ू पकड़ाई गई थोड़ा पानी छिड़क लेना चाहिए... अब गायब हो लेना चाहिए मजदूर आंगन से मार-मार निकाले गए बाल्टिया , लोटे , डोंगे-कटोरे लाए गए  हुआ था तय पेड़ो को पानी दिया जाए नल एक था, सोचा, लोकतंत्र हो जाए रिश्तेदारो को बुलाया गया ईद का जश्न मनाया गया छड़ियों से ऐसे सड़ाके लगाए पर बड़ो की थी एक भुल, वो हमे कैसे क्या करना है लगता है बताना गए भुल पर , पर , पर , पर बोले... कामचोर कही के , ये तो कामचोर है कामचोर कही के , ये तो कामचोर है हमे नह...

Story -12 " Malang" ( love story )

Story 12 "  मलंग " -पियूष गुरुनानी. मैं कमली , मैं और मेरे दोस्त , यहां मैसूर में इस पहाड़ पर कैंपिंग के लिए आए है , जहाँ बाकी दूसरे लोग भी है -...बारिश का मौसम है , और पहाड़ के नीचे एक बड़ी नदी है , तभी मुझे एक लड़का दिखा..."मलंग".... दिन खत्म हो चुका था और रात शुरू नही हुई थी , वो सुन्हेरा पल था , it was a magic hour..उसके लंबे बालों में रोशनी फेल रही थी और उसका प्यार चेहरा चमक रहा था , उसने मेरी आँखों मे देखा , इत्तफाक से हम दोनों की आंखे नीली है और और  झट उसने  मेरा हाथ पकड़ कर...नदी में छलांग लगादी पता नही ये सब अचानक क्या हो रहा था , हम तेज़ी से नीचे गिर रहे थे पर न वो  डरा और ना मैं, पर सब धीरे-धीरे महसूस हो रहा था, जैसे हम एक दूसरे को कई जन्मों से जानते हो , कुछ अधूरा था , वो प्यार , वो लड़ाई , वो बिछड़ना सब दिख रहा था , ...वो बिल्कुल मेरी तरह मस्त मौला है... गिरते ही हम पानी की गहराइयो में चले गए , मुझे तैरना नही आता था , उसने मेरा हाथ अब तक नही छोड़ा था और और हम तैरते गए, वो पानी की ठण्डक , वो प्यारी मछलियाँ , वो खूबसूरत दुनिया...ये सब मैने कभी महसूस नही कि...

Story -11 "चित्र" ( love story)

Story-11 (holida series) "चित्र " -पियूष गुरुनानी. मैं प्रोफेसर मदन शर्म हूँ  , इस विडिओ में आपको ,मेरे द्वारा  खोजी गई ये गुफा के बारे में बताऊंगा , जिसकी दिवारो पर ये आकृतियां बनी हुई है  , जो कि करोड़ो साल पुरानी है " पाषाण युग" की , इन्हें देखकर मैं उसी काल मे जा रहा हूँ और इन चित्रों के पीछे की कहानीयां सोच रहा हूँ.... हहस्जबशसौकव्मनानाबव्हो...(gyberish stone age) ये बात उस समय की है जब क्रम-विकास चल रहा था , जानवर से पूरी तरह मनुष्य होने के बीच का वक़्त , जब नर और मादा वस्त्रहीन रहा करते थे... ये नर  बहुत बीमार है , फिर भी शिकार के लिए निकला है , तभी इसने देखा कि एक दूसरा नर उसी मादा  के साथ यौन क्रिया कर रहा है जिसके साथ उसने संभोग किया था...वो आगे बड़ गया उसने उन्हें रोका नही ,शायद वो उसके साथ बिताए पल सोच रहा होगा जो अग्नि के समान है - जल , वायु और भूमि  के मिश्रण से वो पल  , पहाड़  , जंगल , नदि  के पास... शिकार उसे मिला नही , वो अपनी इस गुफा को आ रहा होगा , तभी उसने मादा की चीख सुनी  जैसे उसका शोषड़ हो रहै हो ,उसकी कमज़ोरी आ...

Story - 10 Tree man ( love story)

Story-10  "  Tree man  ". -पियूष गुरुनानी मेरी आँखे अस्पताल में खुली , मुझे याद आया मैं तो सहाना से मिलने उसके शहर जा रहा था । कई दिनों से मेरे शरीर पर लाल-धब्बे हो रहे थे , पर मैने उन्हें अनदेखा करदिया.... डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे - " ट्री सिंड्रोम" है ....मेरी दुनिया ही पलट गई इसके बारे में मैने कॉलेज में पड़ा था , ये एक  रेयर स्किन कैंसर है , जो 10 लाखो में किसी एक को होता है ,बचपन से ये मेरे खून में था पर अब पंपा है , इस बीमारी में मेरे हाथ-पाव एक पैड़ की छाल जैसे होते चले जाएंगे और धीरे-धीरे मेरे शरीर पर फेलेंगे , और मेडिकल साइंस में इसका कोई इलाज नही , डॉक्टर बोल नही पाया कि में जल्द मरूँगा...उन्होंने कहा सबको कुछ छोड़कर बस यहां भर्ती हो जाऊं...मैने उनसे एक दिन और मांगा और टोंगी के लिए निकल गया...ढाका से टोंगी का रास्ता ज़्यादा लंबा नही था,. बार-बार मेरे मन मे एक ही बात उभर रही थी "सहाना का क्या होगा"....मुझे पता था , मुझे अब क्या करना है...मैं उसके घर पहुँचा... सहाना ओ सहाना बाहर आ अबुल  तुम.... तुमने शराब पी है? एक मेडिकल स्टूडेंट होकर?...चलो ...

Story - 9 Raasleela ( love story)

Story -9 " रासलीला " - Piyush gurunani उसने शादी नहीं की,  उसकी नौकरी चली गई , शायद उसे इस बात का कोई अफसोस  ही नहीं था... सब सड़के बंद है...वो मिल नहीं सकते क्योंकि दूरी ज्यादा है , बात वो उससे कर सकता था मगर एक सुरीली सी मीठी मुलाकात जरूरी है , सुकून के लिए,  उसकी गहरी सांसे मानो सुर्ख नरम-गरम मधुर हो गई ,  दिल के पास उसकी तस्वीर लिए वो दोनों रसीले स्वप्न में मग्न हो गए.... वो मिले पर रूह के शरीर से बने हुए , पय से कोमल सफेद , ना आँख ,  ना मुंह , ना कान... सिर्फ तुम्हारा और मेरा अंतर्मन जो दुनिया की हर खुशी गम और अन्य भागों को पीछे छोड़ आया है,  सिर्फ तुमसे प्रेम करने बिना किसी भाषा के... हाथ पकड़े हम उड़ चले कि नीचे पांव से तारे बरसते चले गोल सी धरा में डुबकी लगाकर सब पार करते चले वो उपवन भी महक उठा गुलाबी शरबत के घोल सा हर एक भूमि करते चले रसीली... चांद पर लेट कर हमने जब देखा सारा ब्रह्मांड ही गुलाबी हो चला था ये सब जब हो रहा था वो मुझ में , मैं उसमें खो रहा था और बात करें चांद की तो वो भी गुलाबी रंग सोख रहा था नशा उसे भी धीरे-धी...

Story - 8. Roller Coaster - love story

Story -8 "Roller- coster" - Piyush gurunani क्या अमित तू बकचोदी कर रहा है यहां गांड फटी पड़ी है , घरवाले मान नहीं रहे हैं बहुत फोर्स कर रहे हैं शादी के लिए  , क्या करूं? अरे तो तू मना कर देना सिंपल ? अहा अहा क्या बात है यह तो मैंने सोचा ही नहीं... कईस नहीं होई सगे थारो मु घरि ने जाई रियो हूं (दोनों अपने चिप्स के पैकेट खत्म कर घर को निकल जाते हैं) उसका नाम अशफाक है जिसकी शादी तय होने वाली है, वो घर को जा रहा है,  अपनी बाइक पर मानसी के बारे में सोचते हुए, मानसी कई सालों से अशफाक की बहुत अच्छी दोस्त है । मगर वो उसे कहीं ज्यादा और कुछ मानता है । वो सारे पल जो उन्होंने साथ गुजारे सब उसकी आंखों के सामने आने लगते हैं... - तू यह नए-नए चश्मे लाता कहां से है ? मुझे भी गिफ्ट कर दिया कर ज्यादा पैसे आ रहे हैं तो । -तेरे मेरे बीच में पैसे पगली? - थाने सिर्फ वेंडा बनाई नो आई सगे "नौटंकी" -मुं कई बनाऊ तू तो हेना वेंडी झालर ( मानसी गुस्से में दौड़ती है अशफाक आगे हंसता हुआ भाग रहा है ,मानसी कीचड़ में फिसल कर गिर जाती है ) -अहा S... वाह बेटे मौज कर दी -यार उठा अब मोच आ ...

Story 7 Rudaali - love sad story

Story -7 "रुदाली" - Piyush gurunani उसके एक सवाल पर मैं भागकर घर आ गया ....शहर में कुछ दिन बाद उसकी फिर याद आने लगी , शायद एक वो ही थी जिसके लिए मैंने,  मैंने अब तक शादी नहीं की,  बस काम काम काम किया और अब उससे दूर भाग रहा हूं...उस बेचारी रुदाली ने कितना कुछ सहा है । औरों के मातम में रोते रोते वो अपने शराबी पति की मौत पर भी ना रोपाई  ,उस खाली रुदाली से मैं प्रेम कर भाग आया ,  एक धक्का और मार आया उसे...बस मैंने घर फोन कर बोल दिया उस रुदाली को घर भिजवा दो यहां एक काम करने वाली चाहिए ।  मैंने अपनी जिंदगी  ऐयाशियों में बिता दी मगर रुदाली से मैंने सिर्फ प्रेम किया । वो आई मगर कुछ बोली नहीं शायद रो कर आई थी , गले लगाने का मन था पर मैं भी रो पड़ता ..कुछ समय हमने साथ गुज़रा... तू साथ है मेरे तू साथ है रोते हैं हम रोते हो तुम क्यों हम साथ हैं हम साथ हैं तेरे हम साथ हैं अब ? घर है तेरा घर है मेरा तो क्या बात है क्या बात है मिट्टी के बर्तन में खाना मुझे देना मिलकर हम दोनों संग साथ रहे हरदम तारों के बादल से चलकर तुम आना रहेंगे हम रहेंगे हम ...

Story 6 - Blossom 2 - love story

Story-6 "Blossom " (part 2) -Piyush gurunani सोता रहा... वो सोता रहा...आया नहीं... तो वह उसके घर पहुंच गई यानी होस्टल । हॉस्टल के बाकी लड़के उसे घूर रहे थे क्योंकि वह बॉयज हॉस्टल था , उसने उसके रूम में घुसकर दरवाजा बंद कर दिया था  । देखा कि उसने फिर से गांजा पिया है  ,तो उसने उसका सारा माल पहले फ्लश किया और फिर उसे उठाया पर वो नहीं उठा , उसका प्यारा मासूम चेहरा देख एक बार के लिए उसने सोचा कि उसे चूम कर वहीं उसके पास सो जाए , पर उसने खुद को संभाला और उसके मुंह पर पानी दे मारा । "बाढ़ आ गई , बाढ़ आ गई" "बाढ़ नहीं मैं हूं " "तुम कौन? तुम बाढ़ से कम हो क्या?" अच्छा साले म****** गांडू एक तो मैं वहां तेरा वेट कर रही थी और तू यहां पड़ा हुआ है  ,ऐसा ही था तो तूने मुझे बुलाया ही क्यों ? तेरा यार हर बार का हो गया है यही ड्रामा , अगर तुझे मुझ से नहीं है प्यार तो बता,  बता दे मेरे साथ पिछले 1 साल से टाइम पास क्यों कर रहा है । यू नो वी आर नॉट मेड फॉर ईच अदर तुम मुझे कभी समझते ही नहीं हो।  लड़के ने सिर खुजाया , उबासी ली और सोचा कि आज ये अचानक हुआ क्या...

Story -5 Blossom - love story

Story-5 "Blossom" -Piyush gurunani Principal ने उसे नही बुलाया था , वो लड़का झूठ बोलकर उसे साथ ले गया और कुछ दिन बाद वो चली गई दूसरे शहर , अपने घर , शायद वो लड़का भी साथ गया था क्योंकि दोनों का घर एक ही शहर में है। नही , वो दोनों अलग-अलग है , अलग-अलग है , "साथ नही है"...भेंछोद! तुझे समझ नही आता? अलग-अलग-अलग... को कब से खुद से ही बात कर रहा था और कुछ देर बाद वीडियो गेम खेलने लग गया , उसके रूम मेट्स भी घर जा चुके थे , वो घर नही गया- अब कोई लगाव बाकी न था । सिर्फ उससे मिलने की तमन्ना लिए , अपना गांजा खत्म कर , ब्लॉसम खेलते खेलते वही धै हो गया । उठा तो मिला अपने अंदर के रूप से , अपनी उम्र से दुगना । पाया अब वो , अब वो "एक कार्टून करैक्टर" बन चुका है । मगर उसने उससे मिलने की ठानी थी , वो उस पेड़ के नीचे आई थी । "वक्त शायद बेवक्त सा हो गया था , या शायद ये फासलों के दरमियाँ था" वो भागता रहा , उस तक पहुँचने के लिए , उसे पाने के लिए , घड़ी भी जैसे भाग रही हो , उसकी  उम्र बढ़ती जा रही थी... पर उसे मिलना था , मिलना है.... उसे रोकना चाहिए था , रोकना- हाँ ...

Story - 4 " Feel : the love inside"

Story-4 "Feel : the love inside" -Piyush gurunani नयनश्री और louis । अब हर romantic कहानी में सबसे पहले हीरो-हीरोइन का नाम और इंट्रोडक्शन आता है । नयनश्री एक हिंदुस्तानी लड़की है जो फ्रांस में पढ़ाई करती है और बहुत शरीफ और वेल कल्चर्ड है , पर उसका बॉयफ्रेंड है louis , जो कि एक फ्रेंच मैन है और वो  दोनों 2 महीने से साथ है । louis बड़ा कूल बंदा है- अब जैसे कि आपको पता है फ्रांस की दौ चीज़े बहुत मशहूर है- फ्रेंच बियर्ड एंड...फ्रेंच किस । फ्रेंच बियर्ड तो उसकी थी । पर किस उसने नयनश्री को कभी नही किया था । उसे डर था वो कही नाराज़ ना हो जाए । उसके सभी दोस्तों ने उनकी  gf को किस कर रखा था । एक दिन उसने उसकी गोद मे लेटे-लेटे , उसकी सलवार कमीज की चुन्नी से खेलते हुए, उसके बाल सवारते हुए कहा - "i want to kiss you" और नायनश्री ने उसे कसकर चाटा मारा..... और  वो अचानक खड़ा हो गया और उससे माफी मांगने लगा और  वो घबरा गई कि उसे हुआ क्या , कही उसे  बुखार तो नही , उसके सिर पर हाथ रखकर देखा...और कुछ देर में louis को पता चला की वो सपना देख रहा था । नायनश्री ने पूछा - " तुम कुछ पूछ...

Story-3 " Fanki Day"

Story -3 "Fanki day" -Piyush gurunani Hey diary! Yayyy , as you know everything , me and fanraaz are together . Yesterday was our 1st month anniversary of togetherness , love , affection , sweetness... I think i am super excited  to tell you what happened yesterday. It was 6 july , 2021. So i was excited , than i planned to surprise him , i thought he didnt remembered our first month anniversary. I told him i have some work , outside city. " Can you please come with me? Please please please. He said yes , than i took him to my secret favourite place  , my old house which is closed since months . We were holding hands and i took him to the roof , which was a small space but...   Than he opened his eyes but there was nothing......tadaaaa.....i made his favourite cup-cakes , we both were in normal clothes but we were looking at each other like " this is gonna stay forever ". We both were hungry , but we didn't told each other about that because all cup-...

Story 2 - "सरगम" - पियूष गुरुनानी

Story 2 "सरगम" -पियूष गुरुनानी मैं उसे रोज़ देखता था , पर हमारी कभी बात ही नही होती थी , होती थी तो सिर्फ संगीत में , मैं उसके लिए तानपुरा बजाता और वो गाती  , उस में ही घुल जाता मैं । उसके पिता जी संगीत के महान गुरु थे , मैरे पास फीस के पैसे ना होने के कारण , मैं उनके घर के छोटे-मोटे काम कर देता । जी , हाँ हम एक ही छत के नीचे रहते थे , फिर भी बात नही होती थी , पर कभी कभी जब मैं उसके पास से गुजरता तो , तो आँखों का एक बार का मिलन हो ही जाता और मैं दिन भर यही सोचता रहता । वो उसके पिता जी के जैसी थी निर्मल , सहज और शांत , बस उस पर प्यार ज़्यादा आता है। मैंने एक दिन हिम्मत कर उसके लिए एक खत लिखा और उसका गोला बनाकर उसकी खिड़की में डालकर भाग गया 4 खत तो मैं युही फाड़ चुका था और जो दिया उसमे लिखा था कि - विणा , मैं अजय , मुझे तुम्हारा संगीत बहुत प्यारा लगता है और उससे भी ज़्यादा तुम मुझे प्यारी लगती हो । पर ना जाने क्यों घर मे हमारी कभी बात नही होती । अगर तुम्हें भी मैं पसंद हूँ तो आज शाम 7 बजे सीता घाट पर आ जाना "नीली चुन्नी" ओढ़े। मैं वहॉं 6 बजे ही पहुँच गया और सोचने ल...

Story 1 "सफर" - पियूष गुरुनानी

Story 1 "सफर" -पियूष गुरुनानी फिर  वही एक कहानी शुरू होती है... मैं  ज़फर  हूँ , मुझे उसका हाल देखकर बुरा लगा और गुस्सा भी आया कि प्यार में लोग पागल क्यों हो जाते है इसलिए मैंने सोचा कि मैं प्यार कभी नही करूँगा । और अगले ही दिन पतंग उड़ाते वक्त एक लड़की दिखी , उसकी पतंग मेरे छत के कोने पर अटक गई थी , , मैने जैसे ही पतंग छुड़ाकर , कन्नी दी । और उसे देखा - सलवार-कमीज़ पहने , खुले बाल , आँखों मे सुरखे तेज़ काजल । प्यार में कहते है शरीर गरम हो जाता है , पेट मे जैसे तितलिया आ आ जाती है , दिल ज़ोर से धड़कता है पीछे गाने बजते है । मगर सबसे पहले आँखे बोलती है कि कौन किस से कितना प्यार करता है । ये सब स्लो-मोशन या फ़ास्ट-फॉरवर्ड में हो रहा था , पता नही । पर में झट से छत से गिरा पर धीरे-धीरे उसे देखते हुए । हाय लग गई , उसके सारे दोस्त मुझ पर हस रहे थे मगर वो नही , जैसे उसे मेरी परवाह हो और मैं भी दर्द में मुस्करा गया मैं राह बनाते चल गया... ****

पश्यताप के आंसू - कविता

पस्चताप के आसूँ -दीनदयाल शर्मा (कहानी) -पियूष गुरुनानी (कविता) पप्पू-कालू गए मास्टर के घर मांगी कुछ किताबे जो सके वो पढ़ मास्टर ने चाँय पिलाई कालू ने कि खिलाई पप्पू ने डाट  लगाई कालू ने चवन्नी घर से चुराई मास्टर को हो गया उस पर शक कालू ने अंत मे दी सच्चाई बक स्नेह-रंज से गले सोए पश्चाताप के आँसू रोए।

"वक्त बताएगा"- कविता

जब एक दिन उसका वक्त बदला, और उसका भाव बदला, तो मेने कहा... कोई बात नही वक्त बताएगा, वक्त सबका आता है एक दिन हमारा भी आयेगा, उसका वक्त बिता और मेरा आया तब मेरा मन्न भी बात नही कर पाया उस दिन मेरा वक्त और भाव दोनो बदला और किसी तीसरे को मेने भाव नही डाला तब उस तीसरे ने कहा... कोई बात नही वक्त बताएगा, वक्त सबका आता है एक दिन हमारा भी आयेगा, और एसे ही वक्त बदलता चला वक्त- समय हमेशा सबका बदलता चला ख्वाबो का सिल-सिला उही बड़ता चला या उही बदलता चला। -पियूष गुरुनानी

"Singhado ki chori ki daastan" Poem

सिंघाड़ो  की चोरी की दास्तान -यतीश कुमार (कहानी) - पियूष गुरुनानी (कविता) मै चलता हूँ मै चलता हूँ मेरे गाँव की ओर मे बड़ता हूँ जो अब शहर हो गया..हूँ जो, अब शहर हो गया अरे , साईकिल से मोटर- साईकिल हो गया साईकिल से मोटर- साईकिल हो गया वो देखती है... वो देखती है... वो देखती है... मुझसे पूंछ्ती है कि  सब ठीक हो गया था? कि सब ठीक हो गया 'क्या' उस डंडी पर मै चलता हूँ उस डंडी पर मै चलता हूँ जहाँ बचपन से मै पलता हूँ उस नहर के बगल मे चलता हूँ जो चिप्पक के डंडी के बहती थी जहाँ हम भी एक पल बहते थे जहाँ हम भी एक पल बहते थे ऊपर से निचे देखो, निचे से ऊपर पर निचे से ऊपर मे होती थी कठिनाई अरे, भईया होती थी कठिनाई स्कुल तो थे 5 किलोमीटर दुर खुलती जहाँ मुख्य सड़क मुड़ ना, हम उसे पेदल पार करते थे हम उसे पेदल पार करते थे चलते- चलते मिलते पोखर चलते- चलते मिलते पोखर उनमे थे, सिंघाड़े और बाकी फल.. हम  वहाँ की मिट्टी लाते थे हम वहाँ की मिट्टी लाते थे जहाँ  पे पानी था, क्या था? "पानी" कहाँ? ठीक बीचो-बिच ठीक बीचो-बिच पर अब फलखान की बारी थी मगर सिंघाड़ो पर ...

Nazme Gazle - poem (valentine week)

अर्थ के भी अर्थ होते है अधुरे शब्दो को जो पुरा करे... मेन्नू की तेन्नू की सान्नू की मेन्नू की ,जो किसी और के लिए जाऊ.. तेन्नू की, मरता है तो मर जाए और अपन काहे वक्त जलेए सान्नू की, कल मरता है तो आज मर जाए क्योंकि , जब उसने चाहा था जीना नाम ने बोला कि इसे मरना हे या जीना कौन जनता हे ये फिर्से होगा नही? मै जानता हू ये होगा ही होगा ही , होगा ही और हमे तब कहना है कि मेन्नू ही , तेन्नू ही , सान्नू ही.. -पियूष गुरुनानी

chacha ki baat - kavita

अर्थ के भी अर्थ होते है अधुरे शब्दो को जो पुरा करे... मेन्नू की तेन्नू की सान्नू की मेन्नू की ,जो किसी और के लिए जाऊ.. तेन्नू की, मरता है तो मर जाए और अपन काहे वक्त जलेए सान्नू की, कल मरता है तो आज मर जाए क्योंकि , जब उसने चाहा था जीना नाम ने बोला कि इसे मरना हे या जीना कौन जनता हे ये फिर्से होगा नही? मै जानता हू ये होगा ही होगा ही , होगा ही और हमे तब कहना है कि मेन्नू ही , तेन्नू ही , सान्नू ही.. -पियूष गुरुनानी

"मेंन्नू की" - कविता

अर्थ के भी अर्थ होते है अधुरे शब्दो को जो पुरा करे... मेन्नू की तेन्नू की सान्नू की मेन्नू की ,जो किसी और के लिए जाऊ.. तेन्नू की, मरता है तो मर जाए और अपन काहे वक्त जलेए सान्नू की, कल मरता है तो आज मर जाए क्योंकि , जब उसने चाहा था जीना नाम ने बोला कि इसे मरना हे या जीना कौन जनता हे ये फिर्से होगा नही? मै जानता हू ये होगा ही होगा ही , होगा ही और हमे तब कहना है कि मेन्नू ही , तेन्नू ही , सान्नू ही.. -पियूष गुरुनानी

मर्ज़ी आपकी है - कविता

शायद सुबह इसलिय होती है की रात को को जो ख्वाब देखे है उन्हे हकिकत मे बदल सके, मर्ज़ी आपकी है, शायद आँखे खुलने से ख्वाब नही टुटते टुटे है या नही?मर्ज़ी आपकी है, ये शायद सही है या गलत मर्ज़ी आपकी है मर्ज़ी "आप ही" की है... -पियूष गुरुनानी

Rang Rasiya poem (valentine week)

रंग-रसियाँ रंग में रस की महक है जैसे रस में मिला गुलाब है जैसे बेसुरा सा हूँ मैं तूम बंदिश सी हो गलत स्वर सा भिखर जाता हूँ तू मिलकर सरगम बन जाती हो आकल से सारंग हो जाती है स्मृति तुम्हारी हर रंग में आती है लाल-लाल सी होली है मलाल न होगा कोई कभी खटपटा सी जाती हो जैसे कोई नारंगी होई निकाह का जश्न है करदो हाथ पीले हल्दी रच गई है सुनेहरे से दिल की तेरे गुमसुम से पतझड़ में हरे- पन की डोली आई आई आई आई ओ , आई आई आई निल निले-निले फूल निल नीला-नीली नदी साफ सरल निरमल गंगा से राधा रची ऊद सा जीवन रहे तुम्हारा रहु न रहू मैं तुम्हारा सात रंग में साथ रंगता तुम रंगरसियाँ रचती मैं इन्द्र सा धनुष बनता मैं तुम पर सोता तुम मुझ में खोती अब मैं मन मे रोता काश, तुम मुझ में होती मैं तुझ में होता जीवन का रस पान होता डर-मौत की ठंड है बाहर काश मैं तुझ में होता रैन तुम्हारी गर्मी में सोता भोर शिव मेरे पास होता कभी मेरी बाहो में सोता कभी तेरे आँचल में रोता सुकून सा मिलता है जैसे कोई काशी घाट हो जैसे दिल मे तेरे सो जाउ तैसे रंग में रस की महक है जैसे रस में मिला गुलाब है...

नाटक- लखंड़

'Mini play' (1- 1:30 min) लघु नाटक - लखंड़  - पियूष गुरुनानी चूहा- सुनती हो मेरी डायन , मेरी भुतिनी...आज हमारी 25 वी सारगिरह है, मुबारक हो ।  भूतनी- जी , आपको भी मुबारक ।  चूहा- मुझे आज भी याद है... जब मैं इस घर मे खाना ढूंढने आ रहा  था , मैरे दोस्तो ने मुझे बहुत टोका इस घर मे एक खूनी डायन रहती है , पर मैं था निडर , शेर की औलाद....तुम्हे देखते ही तुमहारे प्यार में डूब गया (खाँसने लगता है)  भूतनी- मुझे भी आप पर बहुत प्यार आया , इसलिए तो मैंने आपको अमर कर दिया , पर आप रहे छोटे के छोटे ही... (हसने लगती है)  चूहा - चुप कर , कुछ भी बक रही है...सोचा था तुझे आज खुश रखूंगा , पर तेरे लखण्ड नही है , प्यार से बात करने के...आज मजबूर मत कर कि आज भी मैं तुझे शराब पीकर पीटू... जा जाकर बरतन धो और चाय ला , मुझे  चूहा संसद जाना है...जाती है या फुखु मंत्र...  भूतनी (करुण और भयभीत स्वर में ) - न..नह...नही जी , आज मुझे मत मारना...माफ करदेना जी , गलती हो गई जी (उड़कर चाय लेने जाती है)  चूहा - ये बीवियां भी ना , नाक में दम कर रखा है इससे अच्छा तो मैं कोई चुहिया रखेल ...